एक अंदाज़ अच्छा
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स्वप्न समुद्र में लगता अच्छा है,
बीते बचपन पर खोना।
अद्भुत है,
मगर लगता अच्छा है।
खिल खिलाकर पुष्पवर्षा सम
नादानियों पर अपने हंसना,
है विचित्र,मगर लगता अच्छा है।
वजह बहुतेरे हैं लगने को अच्छे,
बहुतेरे ढंग में मिलतें हैं ऐसे
कुछ विचित्र और कुछ विशेष जैसे,
कोई हंसी जब दिल छू जाये,
बेटे-बेटी के चहरे खिल जाये,
मातृ वक्ष से शिशू लिपटा हो,
अनाथ को कोई गोद मिल जाये,
लगता अच्छा है।
जितने हैं नभ के तारे,
बिखरे हैं अच्छे उतने सारे,
लगने को अच्छा तब लगता है,
हों प्रस्तुत जब नजर हमारे।
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