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छवि

 एक कनवास, कागज का कनवास; एक तूलिका इच्छाओं का। हांथ एक, उंगलियां पांच, दो आंखें देखें, दृश्य अस्पष्ट । जो चित ने बनाया छवि आखों से देख, हाथों ने दिया रूप अनोखा एक; इच्छाएं सारी उजागर हुईं, कनवास कागज़ का हुआ अमूल्य।