वो खोये बचपन के दिन! माँ, तेरा ममत्व भरा स्पर्श, वो आंचल में छिपी सुगंध, माँ कितना होता था हर्ष!! असाधारण थी मातृ छाया, उम्र गुजर गये माँ को खोये, बीते बीसों वियोग-व्यथा के दीर्घ-स्वांस भरे सूने सूने वर्ष। यादें सजीव आज भी वही, आज भी सोच होता है हर्ष।